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Hardcover Virah ki sanjh [Hindi] Book

ISBN: B0FQ64G3DT

ISBN13: 9789367938805

Virah ki sanjh [Hindi]

किंतु तुम जिसे रोमांस कहते हो, उसमें कमी पड़ती है, यही न ? क्या हमें कथा-पुस्तकों में से साँचे में ढला रोमांस ग्रहण करना पड़ेगा? बिलकुल नहीं। अपना रोमांस हमी पैदा करेंगे। मैं अपने स्वर्ग और मर्त्य दोनों में रोमांस की रचना करूँगा। तुम लोग उन्हीं को रोमांटिक कहते हो, जो इनमें से एक को बचाने जाकर दूसरे का दिवाला निकाल देते हैं। वे लोग मछली के समान जल में तैरते हैं या बिल्ली की तरह जगह-जगह फिरते हैं या फिर चमगादड़ की तरह आकाश में चक्कर लगाते हैं। मैं रोमांस का परमहंस हूँ। मैं एक ही शक्ति से जल, थल और आकाश में भी प्रेम के सच को प्राप्त करूँगा। नदी के द्वीप पर तो मेरा पूरा कब्जा रहेगा, पर जब मानस की ओर यात्ना करूँगा, तो वह होगी आकाश के खुले मार्ग से। जय हो मेरी लावण्य की, जय हो मेरी - केतकी की और सभी ओर से धन्य हो अमित राय।

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Format: Hardcover

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