आचार्य चतुरसेन शास्त्री ऐतिहासिक और सामाजिक उपन्यासों के बेताज बादशाह माने जाते हैं। उनका उपन्यास 'उस पार' उनकी अन्य चर्चित कृतियों की तरह ही मानवीय भावनाओं और सामाजिक मर्यादाओं के द्वंद्व को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से चित्रित करता है। 'उस पार' मुख्य रूप से मानवीय संबंधों की उन सीमाओं और रहस्यों की खोज करता है, जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है। आचार्य चतुरसेन ने इस उपन्यास में प्रेम, त्याग और विछोह के साथ-साथ समाज के उस 'दूसरे किनारे' (उस पार) को दिखाने का प्रयास किया है, जहाँ आदर्श और यथार्थ का मिलन होता है। यह उपन्यास पाठक को एक ऐसी यात्रा पर ले जाता है जहाँ सांसारिक बंधनों से परे जाने की छटपटाहट है। प्रमुख विशेषताएँ - भावनात्मक गहराईः चतुरसेन जी की यह खूबी है कि वे पात्रों के हृदय की सूक्ष्म हलचलों को शब्दों में बांधने की कला जानते हैं। श्उस पारश में प्रेम की तीव्रता और विवशता का अद्भुत संगम है। - दार्शनिक दृष्टिकोणः उपन्यास केवल एक कहानी नहीं कहता, बल्कि जीवन और मृत्यु, सुख और दुःख के बीच के फासले पर दार्शनिक विचार भी प्रस्तुत करता है। - सशक्त भाषा-शैलीः लेखक ने अपनी विशिष्ट प्रौढ़ और अलंकृत हिंदी का प्रयोग किया है, ज&
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