डॉ. राजेंद्र सिंह जिन्हें लोग प्यार से राजिंदर भी कहते हैं और जो भारत में पानी वाले बाबा के नाम से जाने जाते हैं, ने दशकों पहले भारत की मृतप्रायः नदियों को नया जीवन दिया। उन्होंने नदियों को बाँधा नहीं, बल्कि उनके आसपास की धरा को पोषित-पल्लवित किया। तरुण भारत संघ के अपने कार्यकर्ताओं की मदद से उन्होंने घास और झाड़ियाँ लगाकर प्राचीन भारतीय सिंचाई प्रणाली को पुनर्जीवित किया और सिद्ध कर दिखाया कि न्यूनतम वर्षाजल वाले क्षेत्रों और सिकुड़ती नदियों जैसे शेरनी और पार्वती के जल प्रवाह को भी समृद्ध किया जा सकता है। यह किताब सूखाग्रस्त क्षेत्र के हरित भूमि में बदलने और सूखी नदियों के पाटों के फिर से पानी से लबालब होने की सच्ची प्रेरक कथा है। गाँव वालों के आँखों देखे अनुभव इस किताब में लिए गए हैं, जो पर्यावरणीय पुर्नबदलाव को ही नहीं सामाजिक क्रांति को भी दर्शाते हैं। डरे तबके के रक्षक बन जाने, असहाय परिवारों के खुशहाल समुदाय में बदल जाने की यह कहानी है। यह कहानी बताती है कैसे उन लोगों ने सिंघाड़े की पैदावार और मत्स्य पालन से मिलने वाली आय से गाँवों में स्कूल बनवाएँ, कुएँ खुदवाएँ और साझा सपनों को साकार किया। यह कहानी जल संरक्षण की गंê
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