यह पुस्तक किसी कल्पना या कहानी पर आधारित नहीं है।
मैं अपने जीवन में अनुभव किए गए उस अदृश्य महादेव के बारे में लिख रहा हूँ, जो एक पहाड़ी पर अदृश्य रूप में विराजमान हैं और आज भी अपने भक्तों के साथ निरंतर उपस्थित रहते हैं।
मैंने अपने जीवन में अनुभव किया है कि वही अदृश्य स्वरूप
कभी बिना दिखाई दिए प्रसाद और मिठाइयाँ प्रकट करते हैं,
कभी स्वयं त्रिशूल को हिलाते हैं,
और कभी कुछ ही क्षणों में किसी भी देश, किसी भी स्थान पर पहुँच कर रक्षा करते हैं।
मेरे जीवन में यह दिव्य उपस्थिति पिछले 35 वर्षों से निरंतर बनी हुई है।
हर संकट, हर पीड़ा, हर कठिन मोड़ पर -
मैंने अनुभव किया है कि महादेव अदृश्य रहते हुए भी स्पष्ट रूप से साथ खड़े रहे।
यह पुस्तक चमत्कारों और आशीर्वादों से भरपूर है।
मैंने इसमें उन चल रहे (ongoing) चमत्कारों और कृपाओं को साझा किया है जो आज भी घटित हो रहे हैं।
मेरे अनुभव बताते हैं कि ये दिव्य अनुभूतियाँ केवल अतीत तक सीमित नहीं हैं,
बल्कि आज भी संभव हैं और सच्ची श्रद्धा के साथ किसी के भी जीवन में घटित हो सकती हैं।
कभी किसी को अचानक दिव्य सुगंध का अनुभव होता है,
कभी महादेव विभिन्न रूपों में मिलते हैं और मौन में चले जाते हैं,
और कभी बिन