सुषम बेदी की यह औपन्यासिक कृति बेहद रोमांचक ही नहीं, विचारोत्तेजक भी है। अमरीका में बसे भारतीयों के जीवन पर केंद्रित इस उपन्यास में सुषम बेदी ने उन तथाकथित संत-महात्माओं और बाबाओं का भंडाफोड़ किया है, जो अपनी कुटिलताओं से मानवीय दुर्बलताओं का भरपूर लाभ उठाते हैं। स्वामी रामानंद प्रतीक है ऐसे ही बाबाओं का, जो अपनी भौतिक समस्याओं का तंत्र-मंत्र, चमत्कार के जरिए तात्कालिक समाधान खोजने की मानवीय दुर्बलताओं का पूरा-पूरा फायदा उठाता है। अभिषेक, अल्पना, करन, निकोल प्रतिनिधित्व करते हैं ऐसे लोगों का, जो प्रबुद्ध होने के बावजूद ऐसे ही बाबाओं के दुष्चक्र में फँसकर अच्छा-खासा जीवन विषादमय बना डालते हैं। 'इतर' मात्र उपन्यास ही नहीं, एक चेतावनी भी है उन लोगों के लिए, जो जिंदगी में उन्नति या रोग-निवृत्ति के लिए चमत्कार का 'शॉर्टकट' खोजते हैं।
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