हमारी शिक्षा व्यवस्था में अनेक प्रकार की पाठशालायें काम करती रहती हैं। निजी और कार्पोरेटीय पाठशालाओं में फीज़ भरने की औकात रखनेवाले माँ-बाप के बच्चे ही पढ़ते हैं। इतना ही नहीं उन्हें ट्यूशन और कोचिंग की भी सहूलियत दिलाते हैं। इस के विपरीत प्रशासनिक और गिरिजन पाठशालाओं में मात्र अध्यापकों द्वारा पढ़ाये जाने वाले पाठों पर निर्भर करनेवाले शोषित-ताडित-पीडित वर्गों के बच्चे ही पढ़ते हैं। ऐसे बच्चों पर अध्यापक-अध्यापिकाओं को विशेष ध्यान देने की नितांत आवश्यकता होती है। नहीं तो ड्राप औट बढ़ जाते हैं। ऐसी पाठशालाओं में बच्चों को लिखाने - पढ़ाने के अलावा उनके सर्वतोमुखी विकास के लिए जी-जान से काम करनेवाली अरुंधती और गौरी जैसे अध्यापकों की अनवरत आवश्यकता होती है। ऐसे समस्त अध्यापकों को मैं अपनी " इस्कूली कहानियाँ" समर्पित करती हूँ।शीला सुभद्रा देवी 29 04 2025
ThriftBooks sells millions of used books at the lowest everyday prices. We personally assess every book's quality and offer rare, out-of-print treasures. We deliver the joy of reading in recyclable packaging with free standard shipping on US orders over $20. ThriftBooks.com. Read more. Spend less.