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Paperback Arghya Daan Ki Tripti (अर्घ्य दान की तृप्ति) [Hindi] Book

ISBN: 9371220651

ISBN13: 9789371220651

Arghya Daan Ki Tripti (अर्घ्य दान की तृप्ति) [Hindi]

मैंने अपने देश और समाज को एक सूर्य माना है, सूर्य की किरणें जब अत्यधिक उष्ण हो जाएँ तो जन-जीवन के लिये कष्टकारी होती हैं, और चहुँ ओर हाहाकार मच जाता है। उसी प्रकार समाज में विद्यमान बहुत सामान्य किन्तु बहुत ज्यादा गंभीर विषय जैसे- देशप्रेम, अनुशासन, शिक्षा, समय, जीवन को जीने की कला, गुरु की महत्ता, शोर प्रदूषण, फैशन, नारी सशक्तिकरण, प्रतिस्पर्धा आदि जिनमें भटकाव से भारतीय समाज के स्वरूप में फिसलन अनुभव कर ऐसे विषयों पर अपनी लेखनी चलाई है।
और सौभाग्य मेरा, कि इस कृति के अधिकांश आलेख आकाशवाणी रायपुर से संपूर्ण छत्तीसगढ़ में प्रसारित किये जा चुके हैं, तो कुछ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं, तो एक-दो का पाठ मंच से भी मेरे द्वारा किया जा चुका है। अभिप्राय कि इसमें वर्णित प्रायः-

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Format: Paperback

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