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Paperback Aitbaar [Hindi] Book

ISBN: 9388241029

ISBN13: 9789388241021

Aitbaar [Hindi]

वो जिसके नाम से लज्ज़त बहुत है उसी के ज़िक्र से बरकार बहुत है अभी सूरज ने लैब खोले नहीं हैं अभी से धुप में शिद्दत बहुत है मुझे सोने की क़ीमत मत बताओ में मिट्टी हूँ मेरी अज़मत बहुत है किसी की याद में खोये रहेंगे गुनहगारों को ये जन्नत बहुत है उन्हें मसरूफ़ रहने का मरज़ था उन्हें भी आजकल फ़ुरसत बहुत है कभी तो हुस्न का सदक़ा निकालो तुम्हारे पास ये दौलत बहुत है ग़ज़ल खुद कहके पढ़ना चाहते हो मियाँ इस काम में मेहनत बहुत है डॉ अंजुम बाराबंकवी बुनियादी तौर पर ग़ज़ल के शायर हैं I उनकी ग़ज़लों मैं सागर को गागर मैं सामने का फ़न है और सूफ़ियत भी वे इतिहास और वर्तमान को तुलनात्मक दृष्टि से देखते हैं, साथ ही वे परिवर्तन के पक्षधर भी हैं, और यथास्थिति के विरुद्ध आक्रोश उनकी लिखावट मैं स्पष्ट महसूस किया जा सकता है अंजुम यथार्त की भावभूमि पर खड़ा हुआ कल्पनाओं के तार बुनने वाला बाँका शायर है उनकी अवलोकन और निरीक्षण की क्षमता अदभुत है इनकी रचनाओं में अवध की तहज़ीबों की झलक भी मिलती है और ज़िन्दगी के सभी रंगों का रास भी

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Format: Paperback

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