In Hindi:
प्रस्तुत पुस्तक में नैतिक भाषा और तर्कना के विश्लेषण से संबंधित अधि-नीतिशास्त्र के स्वरूप, क्षेत्र, उदय तथा विकास के साथ-साथ प्रकृतिवाद, निर्प्रकृतिवाद, अलौकिक या अतींद्रियं सत्ता संबंधी सिद्धांतों, संवेगवाद, परामर्शवाद, उचित तर्क संबंधी सिद्धांत और नव्य प्रकृतिवाद इन मुख्य अधिनैतिक सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। इन प्रमुख अधि-नैतिक सिद्धांतों की विवेचना के अतिरिक्त इसमें तथ्यात्मक कथनों से नैतिक निर्णयों के निगमन की महत्त्वपूर्ण समस्या पर भी विस्तारपूर्वक विचार किया गया है। अधि-नीतिशास्त्र जैसे जटिल विषय को भी सरल भाषा-शैली में प्रस्तुत करके लेखक ने इसे पाठकों के लिए सुगम तथा बोधगम्य बना दिया है। नैतिक दर्शन की इस महत्त्वपूर्ण विधा पर हिन्दी भाषा में यह प्रथम पुस्तक है जो इस क्षेत्र में दीर्घकाल से चले आ रहे एक बहुत बड़े अभाव की पूर्ति करती है। हमें विश्वास है कि प्रस्तुत पुस्तक विशाल हिन्दी भाषी क्षेत्र के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में नैतिक दर्शन की इस नवीन विधा-अधि-नीतिशास्त्र-का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के लिए बहुत उपयोगी एë