किताब के बारे में - हम कितने भी बड़े हो जाए लेकिन बचपन का प्यार हमारे दिल के किसी कौने में हमेशा के लिए बस जाता हैं वह प्यार किसी को स्कूल में, किसी को कोचिंग में तो किसी को पड़ोस में मिलता हैं इस कहानी के मुख्य किरदार वीर को वह प्यार स्कूल में मिला उसके बाद उसने भी बाकी प्रेमियों की तरह अपनी क्लास की सबसे खुबसूरत साथी मीरा के साथ जिन्दगी जीने के सपने संजोए मीरा ने भी ऐसी ही कल्पना की, लेकिन परिस्थियाँ ऐसी बनी की दोनों के सपने अधूरे रह गए क्या दोनों एक दुसरे से मिल पाएँगे ? या वीर जो डिप्रेशन का शिकार हो गया हैं वह मीरा तक पहुँचने से पहले ही कुछ कर बैठेगा ? जानने के लिए पढ़िये किताब आख़िरी पन्ना P.S - वीर, हर वो इंसान हैं जिसे किशोर अवस्था में प्यार हुआ या उसका एहसास हुआ मीरा हर वो लड़की हैं जिसने किशोर अवस्था में अपने प्रेमी के साथ जिंदगी बसर के खूब सारे सपने सजाए
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