अफन इकबाल उर्दू साहित्य के ऐसे विशिष्ट और महत्वपूर्ण शाहर है जिन्होंने आधुनिकतावादी उर्दू गजल को एक नई दिशा और पहचान प्रदान की। उनका जन्म 1933 ईस्वी में लाहौर के निकट स्थित सहर ओकाड़ा में हुआ। आधुनिक उर्दू शहरों में हलकारी की एक नई शैली और परंपरा स्थापित करने वाले अग्रणी रचनाकार माने आते हैं। आजार इकबाल ने राहल को केवल एक भावात्मक अभिध्यक्ति नहीं, बल्कि एक यौद्रिक और रवनात्मक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने साबीज की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ समझते हुए, उसे अपनी रचनात्मक प्रतिभा के याक पर घड़ाया और अभिव्यक्ति तया सिल्प के नए साँचे गड़े। उनके यहाँ भाव और तकनीक का असा संतुलन दिखाई देता है। भाषा की सीमाओं को विस्तृत करना, शब्दों को उनके पारंपरिक और शब्दकोषीय अर्थी से अलग करके गए, अप्रत्यासित संदर्भ में सक्रिय करना उनकी शाहरी की विशेषता है। तमाम प्रयोगवादी नवीनताओं के बावजूद अफर इवाल के शेर कभी नौरस या बेनज़ा नहीं होते। उनकी एज़ले पाठक को बार-बार एक नए आश्चर्यलोक की सैर कराती हैं और आधुनिक उर्दू शाइरी को गहराई, ताजगी और बौद्धिक चमक प्रदान करती है।
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