महवियत, जिसे शाब्दिक रूप से विचारों या तन्मयता के रूप में अनुवादित किया जा सकता है,
जीवन, मुक्ति, घटनाओं, सूक्ष्म और जटिल मानवीय भावनाओंऔर उनके बीच की उन अनेक छायाओं पर चिंतन है,
जो अक्सर नज़रअंदाज़, अनदेखी या असंसाधित रह जाती हैं।
कागज़ से कलम ने जब रुख़्सत ली..
इल्म हुआ..
न ही अल्फ़ाज़ मेरे थे.. न ही कहा अनकहा
जज़्बात मेरा था..
ये छंद मेरी यात्रा में विकसित हुए और मुझे समझने या अक्सर कागज़ और कीपैड पर चुपचाप विस्मय व्यक्त करने के लिए प्रेरित करते थे, क्योंकि बोले गए शब्द मिल नहीं पाते थे।
ये छंद मेरे दोस्त रहे हैं जब कोई पास नहीं था, और मुझे उम्मीद है कि ये पाठकों के साथ अच्छे से गूंजेंगे और उन्हें ताकत देंगे,या उनके भावनात्मक तार को झंकृत करेंगे।
उर्दू और हिंदी खूबसूरत भाषाएँ हैं और इन दोनों का उपयोग करके जो भावनाओं की श्रृंखला उकेरी जा सकती है,वह शायद किसी अन्य माध्यम में मुश्किल हो।
मेहनत, मशक्कत, कारोबार और तक़सीम में
हिंदी और उर्दू का हाथ थोड़ा छूट सा गया..
जीवन की सूक्ष्मताओं, सुख और हमारे सबसे गहरे क्षणों में पाई जाने वाली शांत शक्ति और कमजोरियों पर चिंतन करते हुए, हृदय के साथ संनाद करने वाली विषय-वस्तु के ए