सौम्य मॉर्नस्टार की अल्पायु से ही समाज और अध्यात्म के विविध पक्षों का गहन चिंतन करने तथा उन्हें काव्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने में विशेष रुचि रही है। कृति 'जिंदा मुर्दा' उनका पाँच वर्षों के सतत् परिश्रम, मनन, और सृजन का फल है। उनकी कामना है कि यह कृति पाठकों के हृदय में विचार, संवेदना, और आत्मचिंतन का दीप प्रज्वलित करें॥