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Paperback तस्मै श्री श्री [Hindi] Book

ISBN: B0GPB1877V

ISBN13: 9798233144042

तस्मै श्री श्री [Hindi]

"गुरु" की भक्ति, प्रेम, विरह और गुणगान को शब्दों में अभिव्यक्त करने का असंभव और नादान 'लघु' प्रयास यहाँ किया है।

मई 2000 से मैं 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' से जुड़ी हूँ और नवंबर 2002 की देव-दीपावली से आर्ट ऑफ़ लिविंग की टीचर हूँ। (GJ 0166)आर्ट ऑफ़ लिविंग के बहुत सारे कार्यक्रमों (Events) में हिस्सा लिया है, आयोजन (Organize) भी किया है और तन-मन-धन के साथ समय का योगदान भी दिया है। बहुत सारे कोर्स किए और करवाए हैं।

मेरे छोटे-से शहर हिम्मतनगर से लेकर ईडर, अहमदाबाद, गांधीनगर, वासद, वड़ोदरा, नडियाद, सूरत, ऋषिकेश, देहरादून और बेंगलुरु तक गुरुदेव के पीछे-पीछे दौड़ी हूँ, भागी हूँ। कभी दूर से, तो कभी नज़दीक से गुरुदेव के दर्शन हुए हैं। कभी तृप्ति तो कभी अतृप्ति, कभी दुख तो कभी परम आनंद नसीब हुआ है।

आज तक जीवन में कितने उतार-चढ़ाव आए और गए। कभी-कभी श्रद्धा पर सवाल भी उठे। ज़िंदगी के इतने सालों में हालात बहुत कुछ, शायद सब कुछ बदल गया पर एक शाश्वत सत्य कभी नहीं बदला-वह है गुरुदेव की "कृपा और प्रेम"

दुखद घटनाएँ, शारीरिक कष्ट, मानसिक पीड़ा, संताप, चिंता, विकट परिस्थितियाँ, अकेलापन, तहस-नहस कर देने वाले हादसे, उचाट, अवसाद और उद्वेग जैसी अनेक तकलीफ़ें आईं और चली भी गईं। लेकिन इतनी सारी तकलीफ़ें सिर्फ़ एक 'कृपा' से दूर

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