चौराहे का पीपल
लेखक पंकज दुबे
चौराहे का पीपल एक साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन-संघर्ष की मार्मिक कथा है। गाँव के चौराहे पर खड़ा सदियों पुराना पीपल का वृक्ष इस उपन्यास का मौन पात्र है-जो समय, समाज और परिस्थितियों के बदलते रंगों को चुपचाप देखता आया है।
इसी वृक्ष की शीतल छाया में बैठता है रहीमू, एक सीधा-सादा मोची-जिसकी न कोई दुकान है, न नाम का कोई बोर्ड; बस एक बोरी, एक बक्सा और जीवन का निरन्तर संघर्ष। रहाीमू की खामोशियाँ, उसके छोटे-छोटे सपने, और परिवार के लिए किए गए त्याग इस कथा को अत्यन्त भावपूर्ण बनाते हैं।
इस उपन्यास में गाँव की दिनचर्या, लोगों के रिश्ते, उनकी चुप्पियाँ और संघर्ष इतने सहज तथा सजीव रूप में उभरते हैं कि पाठक स्वयं को उसी चौराहे की धूल, धूप और छाँव के बीच खड़ा पाता है।
चौराहे का पीपल केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं; यह उन अनगिनत लोगों का साहित्यिक स्वर है जो अपनी खुशियाँ त्यागकर अपनों के लिए जीते हैं। यह कथा पाठक को भीतर तक स्पर्श करती है और जीवन के गहरे सत्य से परिचित कराती है।
सरल भाषा, सशक्त भावनाएँ और संवेदनशील पात्र-यह उपन्यास पाठक के हृदय में देर तक गूंजता रहेगा।