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Paperback Yogini Ki Atmalipi [Hindi] Book

ISBN: 1645606945

ISBN13: 9781645606949

Yogini Ki Atmalipi [Hindi]

सैकड़ो मील दूर से आती एक चमत्कारिक आवाज । सुकन्या की छाती फटी जा रही थी,वह मरी जा रही थी, उसका अस्तित्व समाप्त हुआ जाता था,प्रेम में,किसी को प्यार करने में । हर बार लगता था इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ । जीवन धन्य हो जाता था, उसका मनुष्य रूप में धरा पर जन्म लेना । कोई भी दिखाई नहीं देता था इस धरा पृष्ठ पर एक नारी और एक पुरुष को छोड़कर बाकी पूरी पृथ्वी बही जा रही थी । उसके माता-पिता थे, उसने एक दिन इस पृथ्वी पर जन्म लिया था, बड़ी होकर यौवन की दहलीज पर कदम रखा था । कुछ भी याद नहीं, उसके पति,संतान,स्वजन कोई भी नहीं । किसी की भी आवाज सुनाई नहीं देती थी। चारों ओर कोई भी नहीं केवल एक नारी और एक पुरुष के अलावा । सुकन्या और जीवन । वह योगिनी डोमी और जीवन उसका कालिदास, कान्हूपा, कन्हाई ।

'योगिनी की आत्मलिपि' एक रहस्य है । सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था । गाया गया संगीत भी बेसुरा हो सकता है। उज्वल आकाश मलिन दिखाई देता है। रास्ता नहीं मिलता । समस्त प्राप्ति और अप्राप्ति के बीच लीन हो जाती थी । सु - सुकन्या -सुकन्या कहां है ? सुकऱ्या कहाँ है।

लेखिका रश्मी राउल आज भी सुकन्या की खोज में है ।

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Format: Paperback

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