आजादी के इतिहास पर अनेक ग्रंथ हैं। कुछ में अग्रणी भूमिका निर्वहन करनेवाले सेनानियों की जीवनियाँ भी उपलब्ध हैं, परंतु स्त्रियों की समान भागीदारी पर बहुत खोजबीन के बावजूद भी कुछ विशेष नहीं मिला।
घर-घर चरखा चलाने, खादी का प्रचार- प्रसार करने, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करने, धरना देने, छूआछूत की भावना मिटाने, मद्य निषेध आंदोलन को सफल बनाने तथा परदा प्रथा उन्मूलन में नारी-शक्ति की लगन, त्याग एवं बलिदान की भावना ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को प्रबल एवं सफल बनाया तथा अपने पुरुष स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर अग्रसर हुईं, लेकिन सिर्फ शिक्षित, कुलीन, संभ्रांत एवं संपन्न वर्ग की ही भागीदारी के मद्देनजर इनका सर्वव्यापीकरण नहीं हो पाया तथा इनका संख्या बल नगण्य सा रहा।
कुछ ऐसी ही महिलाओं के परिवार के सदस्यों से साक्षात्कार, तत्कालीन समाचार-पत्रों की प्रतियों एवं यत्र-तत्र बिखड़ी हुई अल्प उपयोगी सामग्री का संकलन कर प्रस्तुत पुस्तक का प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें स्वाधीनता संग्राम के संदर्भ में बिहार की नारी-शक्ति के योगदान को जनता के समक्ष प्रस्तुत करने के पुनीत कार्य द्वारा बिहार की म