श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान 'सुन्दरकाण्ड' मात्र साहित्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रहस्यों का वह शिखर है जहाँ बुद्धि की सीमाएँ समाप्त होकर दिव्य अनुभव प्रारम्भ होता है। लेखक आनंद सिंह ने इस ग्रन्थ में शब्दों की परतों के नीचे छिपे उस परम ज्ञान को उ]द्घाटित किया है जो आपके अन्तर्मन को आलोकित करने वाला एक संपूर्ण दर्शन है। इस ग्रन्थ की अलौकिक भेंटः - संकटमोचन का अनुभवः यह ग्रंथ मंगलमूर्ति श्री हनुमानजी के अखंड अनुभव की साक्षी है, जो जीवन की हर बाधा को पार करने की दिव्य शक्ति प्रदान करता है जिससे परम लक्ष्य की प्राप्ति सहज हो जाती है। - चरित्र नहीं, चैतन्यः वीर शिरोमणि हनुमानजी का चरित्र-कर्म, ज्ञान और भक्ति की वह त्रिवेणी है, जहाँ मनुष्य का व्यक्तित्व दिव्य चैतन्य में रूपांतरित होता है। - प्रशासनिक विजय सूत्रः हनुमानजी की नीति-निपुणता, राजनीति एवं कूटनीति के वे कालजयी सिद्धांत, जिन्हें आत्मसात कर कोई भी व्यक्ति नेतृत्व और विजय के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है। - सूक्ष्म मार्गदर्शनः इस पुस्तक में सुन्दरकाण्ड के पाठ से प्राप्त होने वाली मंगलकारी फलश्रुति का विस्तृत वर्णन दिया गया है और साथ में भक्ति मार्ग के विचलनों से बच
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