इस पुस्तक को पढ़कर ग्रामीण और देहाती इलाकों में रहने वाले छात्रों का आत्मविश्वास बढ़े; उनके मन में बसी हीनता कम हो और उनकी जिजीविषा और दृढशक्ति विस्तृत हो, यही लेखक का अभीष्ट है। असंख्य संकटों और प्रतिकूलताओं के तूफान में किसी दीपस्तंभ के समान दृढ रहते हुए अपनी संतान के जीवन को दिशा और प्रकाश देनेवाली राजेंद्र की अशिक्षित परंतु सुसंस्कृत माँ और मौसी सबसे अधिक प्रशंसा की पात्र हैं। सुसंस्कृतता, गुणवत्ता, सफलता, इनपर केवल बड़े शहरों में और अंग्रेजी स्कूलों में पढ़नेवाले संपन्न और धनवान छात्रों का अधिकार नहीं है, अपितु जिनके मन में इच्छाशक्ति, मेहनत, लगन, धैर्य, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति अपनी अपार श्रद्धा की ज्योत प्रज्वलित होती है, वहाँ सभी स्वप्न साकार होते हैं। आप कहाँ जन्म लेते हो, आपके माता-पिता अमीर हैं या गरीब, आप शहर में रहते हो या गाँव में, अंग्रेजी, निम्न अंग्रेजी, सी.बी.एस.ई. माध्यम में पढ़ते हो या अपनी मातृभाषा में? इन बातों का आपकी सफलता एवं असफलता से कोई संबंध नहीं है। आपके विचार, स्वभाव एवं जी तोड़कर मेहनत करने का जज्बा, इन्हीं पर आपका भविष्य निर्भर होता है। युवा IAS अधिकारी राजेंद्र भारुड का संघर्षमय, किंत
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