About the book: इस उपन्यास की कथावस्तु मूल आत्मा के रूप में अपने समय की अनिद्य सुंदरी रतन बाई पेटिट उर्फ रुत्ती, और देश के धनाड्य उद्योगपति एवं जिन्हा के सर्वाधिक विश्वसनीय दोस्त, दिनशॉ पेटिट से कथित क्रायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्हा द्वारा किये गए पीड़ादायक धोखे पर आधारित है। दिनशॉ पेटिट की सोलह वर्षीय बेटी रुत्ती, जिसे जिन्हा ने उसके शैशवकाल में उस समय से अपनी गोद में खिलाया था जब उसके सामने के दो दांत निकल रहे थे। नैतिकता और विश्वास की सारी सीमाओं को तोड़ इकतालिस वर्ष की उम्र में जिन्हा द्वारा उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्म परिवर्तन करवा निकाह करने, और फिर तिल-तिल तिरस्कृत कर उसके साथ असहनीय अमानवीय व्यवहार कर उस कोमल सी अपूर्व सुंदरी लड़की को अपने निर्णय पर पश्चाताप करते हुए सिर्फ 29 साल की उम्र में सिसक-सिसककर तड़फते हुए मरने पर मजबूर कर देने की कहानी है इसके पृष्ठों पर। यह उपन्यास रुत्ती की पल-पल घुटन और टूटन को मार्मिक रूप से उजागर करता है।
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