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Hardcover Narmada KI Subah (Hindi Edition) [Hindi] Book

ISBN: 9358693606

ISBN13: 9789358693607

Narmada KI Subah (Hindi Edition) [Hindi]

◆उन दिनों नागपुर ही मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी हुआ करता था। शासन के सूचना प्रकाशन विभाग में पत्रकार की हैसियत से काम करते मुक्तिबोध वहीं काम करते अपनी तरह के अनूठे व्यंग्य-कवि 'विद्रोही' और उनके मार्फत प्रदेश के दूसरे तरुण कवियों-लेखकों से भी जुड़ गए। नागपुर आकर उन्हें लगा कि वह अकेले नहीं हैं और मरने-मारने को तत्पर एक छोटी-सी सिल टोली उनके साथ है जो नई कविता की फ़ैशनेबल सौन्दर्याभिरुचि से दूर रहकर काव्य की मूल प्रगतिशील धारा के सम्बर्धन में योग दे रही है। 'दूसरा सप्तक' छप चुका था। मुक्तिबोध को यह देखकर हैरानी हुई कि नई कविता के नाम से प्रस्तुत छठे दशक की कविता 'तारसप्तक' के मूलतः वामपन्थी रुझान को छाँट-तराशकर कोरमकोर सौन्दर्यपरक बनती जा रही है। ऐसा तो छायावाद के ज़माने में भी नहीं हुआ था। तो क्या यह सब उनके नव-स्वाधीन देश को अन्तर्राष्ट्रीय पूँजीवाद के गिरफ्त में रहे चले आने के लिए ही किया जा रहा है? उन्हें लगा कि लड़ाई मात्र कलामूल्यों की नहीं है। इसे 'राजनीतिक शीतयुद्ध की साहित्यिक शास्त्रा' नाम देते हुए विरोधियों से जूझने के लिए वह खुले मैदान में उतर आए। एकदम नए और अपरिचित कवियों के अटपटे किन्तु तेजस्वी स्वर उनके आस

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Format: Hardcover

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