"मैं गीतों की जादूगरनी" गीत संग्रह की रचयिता शैलजा सिंह के गीत सभी संगीतात्मक के साथ-साथ बहुत ही सरल व सहज हैं। साहित्य मर्मज्ञ स्वर्गीय केदारनाथ सिंह कहते हैं- "गीत कविता का अत्यंत निजी स्वर है। गीत सहज सीधा-साधा अकृत्रिम होता है। मैं गीतों की जादूगरनी सहज है। मैंने शैलजा के काव्य पाठ का माधुर्य देखा है, उनकी रचनाधर्मिता देखी है, पुस्तक की पाण्डुलिपि हाथ में आते ही उधेड़बुन में आ गई कि शैलजा के व्यक्तित्व का विस्तार दूँ या कृतित्व को। गीत संग्रह का शुभारंभ ही माँ बागेश्वरी की वंदना जिसमें वह चाहती है कि समाज 'धवलमना' हो जाए से हुआ है - युद्ध रुके जल थल नभ में बस शांति विश्व में फैले तुझ-सा धवलमना हो सारे तजें आचरण मैले
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