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Hardcover Lokgeeton Ka Samajshstra [Hindi] Book

ISBN: 9358698411

ISBN13: 9789358698411

Lokgeeton Ka Samajshstra [Hindi]

लोकगीत एक ऐसी सांस्कृतिक विधा है जो एक पीड़ी से दूसरी पौड़ी तक हस्तांतरित होती है। अन्य सांस्कृतिक मूल्यों की तरह यह समाजीकरण की भी एक प्रक्रिया है। आवश्यक नहीं कि यह परिवार के साथ ही सीखने का हिस्सा हो। लोकगीत सीखने की पद्धति का विकास एक दूसरे से मिलने-जुलने से होता है, अतएव यह साझी संस्कृति की विरासत भी है। लोकगीतों की विभिन्न शैलियाँ हमें बताती हैं कि हमारे साथ इस जगत में अन्य अनेक लोगों की भी विशेष शैलियाँ हैं। एक गाँव से दूसरे गाँव में विवाह आदि होने से इन शैलियों का निदर्शन हमें मिलता है। एक ही प्रकार के संस्कार के आयोजन होने पर भी देवी-देवताओं में भी अंतर आ जाता है। हम जो जानते हैं वह अन्य गीतों से कैसे अलग है, क्या गाने की कोई विशेष पद्धति है या क्या कोई विषय हमारे लोकगीत के एक जैसे हैं? क्या लोकगीतों के गायन ने आत्मिक संवाद उपस्थित किया, जब समाज के मध्य गीतों को गाया जा रहा था, तो मेरी या अन्य की क्या प्रतिक्रिया थी? ऐसा कौन-सा सांस्कृतिक प्रभाव था जो एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे थे या यह मूल गीत से किस प्रकार भाव-भंगिमा एवं शैली में अलग था? लोग लोकगीतों का प्रयोग कहाँ-कहाँ और कैसे-कैसे करते हैं- देवी गीत गाते हुए शब्द और लय का 

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Format: Hardcover

Condition: New

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