खिड़की से देख हाल ए मौसम बताया नहीं जाता
निकलो बाहर तो बारिश से ख़ुद को बचाया नहीं जाता
दिल-ओ-ज़ेहन के दरबों में सिमटे हुए हो तुम
उड़ना हो फलक पे तो पिंजरों को मकां बनाया नहीं जाता
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तुम चराग़ हो तो चराग़ सही मेरे यार, लेकिन
कितनी भी हो चमक, आफताब को दिखाया नहीं जाता
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