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Paperback Koun Jayega Sath [Hindi] Book

ISBN: 9391390498

ISBN13: 9789391390495

Koun Jayega Sath [Hindi]

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Book Overview

सामाजिक अव्यवस्था, अलगाव, विषमता और कुरीतियों के विरुद्ध संसद से सड़क तक लगातार अपनी आवाज उठाने वाले ओड़िया के बहुचर्चित समकालीन कवि डॉक्टर प्रसन्न कुमार पाटशाणी से हिंदी के पाठक अपरिचित नहीं है। पहले भी इनके काव्य संग्रह हिंदी में अनूदित व प्रकाशित हो चुके हैं। हिंदी में अनूदित इस नवीनतम काव्य संग्रह में एक ही जगह समाजवाद, पूंजीवाद, गरीबी, शोषण, अत्याचार, मंदिर, मस्जिद, सांप्रदायिकता आध्यात्म आक्रोश, क्रांति, राजनीति, प्रकृति और जीवन की क्षणभंगुरता संबंधी कविताओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। कवि से उसका परिचय मांगने पर कभी कहता है ""मुझसे परिचय मत मांगो मैं एक आर्त्तनाद के सिवा कुछ नहीं !!"" समाज में व्याप्त वैमनस्यता और भेद-भाव के विरुद्ध क्रांति का बिगुल बजाते हुए कवि अपनी प्रिया का साथ मांगते हुए कहता है ""यदि मेरे साथ तैर सकती हो तो आओ, तैरो मेरे साथ क्रांति की नदी में तोड़कर सारे बंधनों की डोर।"" कवि का मानना है कि जाएगा कोई नहीं साथ। रिश्ते सब निभेंगे इसी मृत्युलोक में। संग्रह की लगभग सारी कविताएं पाठकों को निश्चित ही काफी कुछ सोचने पर मजबूर कर देंगी। कविताओं की सीधी-सरल भाषा में अद्भुत प्रवाह है। यह काव्य-गुण संग्र

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