पेज -41, भाषा- हिंदी गज़ल, शायरी, कविता,गीत संग्रह मेरी नींदों में जो आये,वो तेरा ही हसीन ख्वाब है मेरी सांसो में जो समाये, वो तेरी खूबसूरती का रुबाब है।पूछे हर रोज़ ये धड़कन मेरी- ख़्वाहिसों से दबे,इस बेजान दिल से,की बता तेरे धड़कने का,आखिर क्या राज है।जबाब दे ये दिल, तो क्या दे,वो हर लम्हा - हर पल इस बात से परेशान हैअब कैसे बताये ये दिल भी,अपनी धड़कनो को,की तू इस ज़िस्म की रूह है,तो वो इस ज़िस्म की जान है।बेचैन सा रहु में तेरे खयाल में हर दम,तेरे नूर ये आंखों में क्या शबाब है?पूछे अगर कोई मुझसे सबाल खूबसूरती पर, तो तेरे नाम से बेहतर और क्या जबाब है।फुरसत से बनाया है उस ख़ुदा ने तुझे,उसकी तारीफ ये कारीगरी, बड़ी लाज़बाब है।लफ्ज़ लफ्ज़ महकता,तेरे खूबसूरती के पन्नो सेजैसे तू हुस्न की कोई,खुली किताब है। ढकता नही यहाँ,हर कोई किसी की आबरु को, फितरत ही है इस दौर की -किसी की मोहब्बत को करना, बेनकाब है।डरता हूँ मै तेरी फिक्र में हर लम्हा,सुना है ये ज़माना, बड़ा खराब है।......आजाद वर्मा (AJ.)vermaazad111@gmail.com(march 2020 )
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