इस सदी की सबसे बड़ी तकलीफ यही है कि उसके सौंदर्य का बोध खो गया है। और हम लाख उपाय करते हैं सिद्ध करने के कि वह नहीं है। और हमें पता नहीं कि जितना हम सिद्ध कर लेते हैं कि वह नहीं है, उतना ही हम अपनी ही ऊंचाइयों और गहराइयों से वंचित हुए जा रहे हैं। BR>आंखें खोलो थोड़ा हृदय को अपने से ऊपर जाने की सुविधा दो। काम को प्रेम बनाओ । प्रेम को भक्ति बनने दो ।पीड़ा होगी बहुत। विरह होगा बहुत । बहुत आंसू पड़ेंगे मार्ग में। पर घबड़ाना मत। क्योंकि जो मिलने वाला है उसका कोई भी मूल्य नहीं है। हम कुछ भी करें, जिस दिन मिलेगा उस दिन हम जानेंगे, जो हमने किया था वह ना-कुछ था। तुम्हारे एक-एक आंसू पर हजार-हजार फूल खिलेंगे। और तुम्हारी एक-एक पीड़ा हजार-हजार मंदिरों का द्वार बन जाएगी। घबड़ाना मत। जहां भक्तों के पैर पड़े, वहां काबा बन जाते हैं । BR>पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु - भक्ति का सार-सूत्र क्या है ? - क्या विधिविहित पूजा-प्रार्थना व्यर्थ है ? - अभिनेता होने का अर्थ - क्या प्रेम और मृत्यु के बीच कोई आंतरिक संबंध है ? - सम्मोहन का अर्थ - विद्यार्थी और शिष्य का फर्क - प्रेम से ज्यादा सूक्ष्म और कुछ भी नहीं
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