बादशाह अकबर के दरबार के रत्न बीरबल अत्यधिक व्यवहार-कुशल, ईमानदार और विवेकबुद्धि से संपन्न इंसान थे। अपनी बुद्धि के बल पर उन्होंने अकबर बादशाह के दरबार में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। उनके ज्ञान और प्राप्त सम्मान के कारण अन्य दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे और अनेक बार उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास भी करते थे किन्तु बीरबल अपनी हाज़िरजवाबी तथा प्रवीणता के कारण बार-बार उनके प्रहारों से बच निकलते थे। ऐसा कहा जाता है कि कई बार बीरबल की अनुपस्थिति से दरबार सूना-सूना लगता था और बादशाह अकबर भी उदास हो जाते थे। इन्हीं बीरबल की हाज़िरजवाबी का एक उदाहरण है, यह पुस्तक अकबर बीरबल विनोद
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