डॉ. राजेंद्र मोहन भटनागर ऐतिहासिक और जीवनीपरक उपन्यासों के लेखकों में सबसे अग्रणी हैं। इस तरह के उपन्यास लिखना एक विशेष कौशल की माँग करता है। डॉ. भटनागर इस कला में सिद्धहस्त हैं, जो उनके इस तरह के 80 से अधिक बहुप्रशंसित उपन्यासों से प्रमाणित है। 2 मई 1938 को अंबाला में रोहतक के एक जमींदार-परिवार में जन्मे डॉ. भटनागर ने इन उपन्यासों के अतिरिक्त 14 नाटक, 13 कहानी-संग्रह, 18 आलोचना-पुस्तकें और कई जीवनियाँ, यात्रा-वृत्तांत, विचार और बाल-साहित्य की पुस्तकें भी लिखी हैं। उनकी अनेक कृतियों का अंग्रेज़ी, फ्रेंच, कन्नड़, मराठी, गुजराती आदि भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। राजस्थान साहित्य अकादमी के सर्वोच्च 'मीरा पुरस्कार' और हरियाणा साहित्य अकादमी के 'वरिष्ठ साहित्यकार सम्मान' सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. भटनागर का यह उपन्यास नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन और मृत्यु संबंधी कई रहस्यों पर से रोमांचकारी ढंग से परदा उठाता है।