पुस्तक के बारे में 'आहट' में जयिता गांगुली मन के सबसे कोमल कंपन सुनती हैं-स्मृतियों के धीमे कदमों को, इच्छाओं की हल्की हलचल को, और भीतर बदलते मौसमों की अनकही सरगर्मियों को। ये कविताएँ नरम गति से आगे बढ़ती हैं, पर अपने भीतर गहरे भाव, ठहरे हुए मौन और रोज़मर्रा के जीवन की सूक्ष्म जिरहें समेटे हुए हैं। गांगुली की काव्य-भाषा आत्मीय और सधे हुए स्वर में साधारण क्षणों को उजले, अर्थपूर्ण अनुभवों में बदल देती है। उनकी छवियाँ सादगी में भी गहरी हैं; शब्द कम हैं पर परतें बहुत। हर कविता एक आगमन है-एक आहट-जो पाठक को स्त्री-अंतरलोक, प्रतीक्षा, लालसा और आत्म-पहचान की नाजुक दुनिया में प्रवेश कराती है। सौंदर्य और संवेदना से बुनी हुई, 'आहट' पढ़ने के बाद भी मन में लंबे समय तक गूंजती रहती है-जैसे किसी शांत कमरे में कदमों की धीमी प्रतिध्वनि, जो एक अपूर्ण कहानी के आगे बढ़ते रहने की आहट देती है। लेखक के बारे में जयितागांगुली एक लेखिका, कवयित्री, अनुवादक और स्वतंत्र शोधकर्ता हैं, जो बंगला और अंग्रेज़ी-दोनों भाषाओं में काम करती हैं। उनके अकादमिक और रचनात्मक सरोकारों में जेंडर स्टडीज़, नैरेटिव थ्योरी, ट्रांसलेशन स्टडीज़ और दक्षिण एशियाई साहित्यिक संस्क
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