'सतरंगिनी' में एक गीत है और उनचास कविताएं। इन्हें बच्चनजी ने सात रंगों के शीर्षकों में विभाजित किया है। प्रत्येक रंग की कविताएं अपनी विशिष्टता लिये हुए हैं और इनमें से कई कविताएं आज लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच चुकी हैं। बच्चनजी ने 'सतरंगिनी' की भूमिका में अपने पाठकों से अनुरोध किया है कि वे उनकी मनोभूमि को अच्छी तरह समझने और इन कविताओं का पूरा आनंद लेने के लिए 'सतरंगिनी' से पहले प्रकाशित उनकी रचनाओं, 'निशा निमंत्रण', 'एकांत संगीत', 'आकुल अन्तर', 'मधुबाला', 'मधुशाला' और 'मधुकलश' को भी अवश्य पढें।
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