'1857 का स्वातंत्र्य समर' वीर सावरकर की वह ऐतिहासिक कृति है, जो केवल अतीत का वर्णन नहीं करती, बल्कि स्वयं इतिहास बन जाती है। यह ग्रंथ 1857 की घटना को एक साधारण सिपाही विद्रोह से ऊपर उठाकर प्रथम संगठित भारतीय स्वातंत्र्य संग्राम के रूप में स्थापित करता है। गहन शोध, ओजस्वी भाषा और निर्भीक दृष्टि के कारण यह पुस्तक ब्रिटिश शासन के लिए इतनी भयावह सिद्ध हुई कि इसे प्रकाशित होने से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया। गुप्त संस्करणों, अंतरराष्ट्रीय वितरण और क्रांतिकारियों के बीच इसके प्रसार ने इसे देशभक्तों की 'गीता' बना दिया। भगत सिंह, गदर आंदोलन और आजाद हिंद फौज तक इसकी वैचारिक प्रेरणा पहुँची। यह ग्रंथ बताता है कि इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि चेतना जगाने वाला विचार भी होता है। 1857 का स्वातंत्र्य समर' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा को समझने के लिए एक अनिवार्य और कालजयी कृति है।
ThriftBooks sells millions of used books at the lowest everyday prices. We personally assess every book's quality and offer rare, out-of-print treasures. We deliver the joy of reading in recyclable packaging with free standard shipping on US orders over $20. ThriftBooks.com. Read more. Spend less.