कुछ प्रेम कहानियाँ मिलन की होती हैं।
कुछ विरह की।
और कुछ ऐसी होती हैं जो कहानी होना छोड़कर अवस्था बन जाती हैं।
तुम कोई कहानी नहीं थे। "तुम" किसी रिश्ते के टूटने की कथा नहीं है, बल्कि उस शांति की खोज है जो टूटने के बाद जन्म लेती है। यह उपन्यास प्रेम को स्मृति से निकालकर अस्तित्व में बदलते हुए देखता है। यह समय को दुश्मन नहीं, विस्तार मानता है। यह दुःख को अंत नहीं, रूपांतरण समझता है। और यह खालीपन को अभाव नहीं, निवास की तरह स्वीकार करता है।