बाबू देवकीनंदन खत्री के कालजयी उपन्यास चन्द्रकान्ता का यह रंगमंचीय रूपांतरण मूल कथा के रोमांच और रहस्य को मंच पर सजीव करता है। प्रेम, रहस्य, ऐयारी, तिलस्म और षड्यंत्रों से भरपूर इस अद्भुत संसार ने पीढ़ियों से पाठकों को मंत्रमुग्ध किया है। इसी लोकप्रिय कथा को नाटककार मथुरा कलौनी ने रंगमंच के लिए एक नए रूप में प्रस्तुत किया है। मूल कृति की भव्यता और आकर्षण को बनाए रखते हुए यह रूपांतरण आज की मंच-प्रस्तुति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह मंचन के लिए सहज होने के साथ-साथ पाठकों के लिए भी रोचक और प्रभावशाली है। चन्द्रकान्ता नाटक नई पीढ़ी के दर्शकों और पाठकों को चन्द्रकान्ता के शाश्वत जादू से परिचित होने का आमंत्रण देता है।