द पिलग्रिम्स प्रोग्रेस ने सफ़र दिखाया - यह किताब आपको उस पर चलने में मदद करती है
तीन सदियों से भी ज़्यादा समय से, जॉन बनियन की लिखी बातों ने पढ़ने वालों को एक ऐसी सच्चाई से रूबरू कराया है जिसे हल्का नहीं किया जा सकता
ईसाई ज़िंदगी को सिर्फ़ समझा नहीं जा सकता।
इस पर चलना भी ज़रूरी है।
द पिलग्रिम्स प्रोग्रेस से लेकर ग्रेस अबाउंडिंग और द चीफ ऑफ़ सिनर्स तक, बनियन ने थ्योरी से नहीं लिखा। उन्होंने झगड़े, यकीन और एक ऐसी ज़िंदगी से लिखा जो अब और नहीं बदल सकती थी। उनके शब्द इसलिए बने रहते हैं क्योंकि वे किसी आइडिया को नहीं-बल्कि एक अनुभव को बताते हैं।
यह किताब वहीं से शुरू होती है।
यह किताब क्यों है
बहुत से लोगों ने बनियन को पढ़ा है।
बहुत से लोग उनसे प्रभावित हुए हैं।
लेकिन बहुत कम लोगों ने वह जिया है जो उन्होंने बताया।
कुछ लोगों को उनकी भाषा दूर की लगती है।
दूसरों को उनकी गहराई बहुत ज़्यादा लगती है।
बहुत से लोग सच्चाई को पहचानते हैं-फिर भी पहचान पर ही रुक जाते हैं।
यह किताब उस कमी को पूरा करती है। यह बनियन के मैसेज को एलेगरी और ऑटोबायोग्राफी से निकालकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लाती है-
स्टेप बाय स्टेप, डिसीजन बाय डिसीजन।
इस