यह उपन्यास विराज और वसुंधरा की उन भावनाओं की कथा है, जिन्हें जीवन ने कई मोड़ देकर परखा, कभी दूरी से, कभी संघर्ष से, और कभी नियति की कठोर लिखावट से।
एक ओर विराज, जिसका बचपन बिछड़न और अकेलेपन में बीता। दूसरी ओर वसुंधरा, निर्मल हृदय वाली वह युवती, जिसका जीवन एक दिन अचानक बदल गया।
संयोग से शुरू हुई उनकी मुलाकात, परिस्थितियों से बिछड़ गई,पर प्रेम और भक्ति के सहारे उनकी यात्रा आगे बढ़ती रही।
"नियति का लेख" मनुष्य के जीवन में प्रेम, विश्वास, संघर्ष और भाग्य की भूमिका को छूने वाली एक संवेदनशील कहानी है, जहाँ कुछ भी बिना कारण नहीं होता, और हर मोड़ कहीं न कहीं नियति का लिखा हुआ प्रतीत होता है।