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Paperback अथ मार्जरिका उवाच [Hindi] Book

ISBN: 9356193975

ISBN13: 9789356193970

अथ मार्जरिका उवाच [Hindi]

क्या इतिहास केवल तारीखों का ढेर है, या प्रतीकों की एक रहस्यमयी भाषा?

'अथ मार्जरिका उवाच' मात्र छंदों का संकलन नहीं, बल्कि साहित्य जगत में एक क्रांतिकारी नवाचार है। यह संभवतः हिंदी साहित्य के इतिहास में पहली बार हुआ है कि आदिकाल के आर्यावर्त से लेकर 2025 के 'अमृत काल' तक के संपूर्ण भारतीय कालक्रम को एक विस्तृत 'प्रतीकात्मक पुनर्पाठ' (Symbolic Reinterpretation) के माध्यम से डिकोड किया गया है।

समय की साझीदार और तटस्थ प्रेक्षक 'मार्जरिका' (एक काल-जयी बिल्ली) के मुख से निकली यह गाथा शुष्क ऐतिहासिक तथ्यों से परे जाकर राष्ट्र की आत्मा को टटोलती है। इस महाकाव्य की सबसे बड़ी शक्ति इसका 198 मानकीकृत प्रतीकों का 'प्रतीक-कोष' है, जो जटिल राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों को एक जीवंत साहित्यिक रूप प्रदान करता है।

इस पुस्तक के पन्नों में आप साक्षी बनेंगे

'श्वेत कपोतों' (शांति और शुरुआती स्वतंत्रता) के युग से लेकर 'महाबाघों' (आधुनिक राष्ट्रीय पौरुष) के उदय तक के सफर का।'रानी की तानाशाही', 'मौन कपोत' का शासन, और 'डिजिटल यज्ञ' व 'नभ-सारथी' (अंतरिक्ष संधान) जैसी तकनीकी छलाँगों का।भारत के राज्यों का उनकी भौगोलिक सीमाओं से परे एक नया परिचय-जैसे 'दर्रों की भूमि' से लेकर 'धरती का स्वर&#

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Format: Paperback

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