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Paperback श्लोक: अजन्मा मैं / Shlok: Ajanma Main [Hiligaynon] Book

ISBN: 9358988908

ISBN13: 9789358988901

श्लोक: अजन्मा मैं / Shlok: Ajanma Main [Hiligaynon]

ये कहानी है उन तीन दोस्तों की है जो हालात और रिश्तो के मारे थे। फिर अचानक किस्मत ने उन्हें आपस में मिला देती हैं। जिन्होंने अपनी जिंदगी सिर्फ अपने घरवालों के नाम पे कर दी थी। अपनी अधूरी जिंदगी के साथ बस जी रहे थे। असली जिंदगी इन तीनो ने तब 'जी" जब वो एक साथ आये। किस्मत ने उसे मिलाया। अपने लाइफ को खुल के जिया, अपने आप से पहचान हुई। बस कुछ ऐसी ही जिंदगी की कहानी के कुछ पन्नों को आपके सामने रखने का प्रयास किया है। पढ़िए और याद कीजिये फिर से उन लम्हों को जो आपने अपने दोस्तों के साथ बिताएं होंगे क्योंकि आपकी जिंदगी में भी तो ऐसे "दोस्त होंगे ही"।

लेखक के बारे में

मुंबई के एक छोटे से इलाके में पला बढ़ा, मैंने अपनी शिक्षा एन ऐल हिंदी स्कूल से पूरी की और जे एम पटेल कॉलेज से कॉमर्स की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान, नुक्कड़ नाटक से लेकर एकांकिका तक का सफर बेहद रोमांचक रहा। बचपन से ही अभिनेता बनने का सपना था, लेकिन किस्मत ने मुझे लेखक बना दिया। स्कूल और कॉलेज में कई प्रतियोगिताएँ जीतीं, चाहे वह नाटक हो या भाषण। अभिनय और लेखन दोनों ही मेरे जीवन का हिस्सा रहे हैं। पेशे से मैं सेल्स में कार्यरत हूँ, लेकिन लिखना मेरे दिल के करीब है। कविताओं में उग्र

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Format: Paperback

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