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Paperback जब भीगी माटी मन की [Hindi] Book

ISBN: 9369532854

ISBN13: 9789369532858

जब भीगी माटी मन की [Hindi]

जिस प्रकार सूखी पड़ी मट्टी में जब बारिश की फुहार पड़ती है तो एक सौंधी-सी ख़ुशबू जन्म लेती है और वह सुगंध हमारे मन को आनंदित कर देती है, भाव विभोर कर देती है, विचार-शून्य कर देती है। ठीक उसी प्रकार जब मानव मन पर विषयों का प्रभाव पड़ता है तो भावनाएं, छंद का दामन थाम कर कविता का रूप धारण करती हैं ।इस काव्य-संग्रह में बचपन से लेकर आज तक कविताओं की मेरी संपूर्ण यात्रा शामिल है। यह कविताएं वास्तव में मात्र शब्द नहीं है बल्कि बाल मन से युवा मन तक का सफ़रनामा है । इस जीवन के रंग बहुत ख़ूबसूरत हैं और ख़ूबसूरत हैं सारे एहसास। उन्हीं कुछ एहसासों को अल्फ़ाज़ों का लिबास पहना कर आपसे मिलवाने लाया हूं। मुझे आशा है कि ये मुलाक़ात आपको रास आएगी।

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Format: Paperback

Condition: New

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