शब्दों के माध्यम से गूढ़ रहस्यों को वाणी देने वाले और अपनी कलम से मानवीय संवेदनाओं की गहराइयों को नापने वाले एक अद्भुत शब्दशिल्पी हैं अंकित चौधरी। साहित्य के विशाल पटल पर वे 'शिव' उपनाम से सुपरिचित हैं। धूल में खिलने वाले फूल से लेकर अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मंच तक की उनकी यात्रा केवल एक सफलता नहीं है, बल्कि अक्षरों के प्रति उनकी अटूट साधना का परिणाम है।
अंग्रेजी साहित्य में M.A. और B.Ed. की उच्च शैक्षणिक उपाधियाँ प्राप्त करने वाले अंकित चौधरी 'शिव' केवल एक भाषा की सीमाओं में बंधे हुए नहीं हैं। गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी-इन तीनों भाषाओं पर समान अधिकार रखने वाली उनकी कलम उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और विशाल वैचारिक दृष्टिकोण को उजागर करती है।
शुरुआत में 'शेयरचैट' पर अपनी आवाज़ का जादू बिखेरकर 'द्रोणाचार्य अवार्ड' से सम्मानित इस रचनाकार ने अपने भीतर छिपे कथाकार को एक मुक्त आकाश प्रदान किया। उनकी कलम से रचित 'कालरात्रि', 'कालो', 'भेदी पिया', 'ल्यूकेमिया', 'कर्तव्य - एक बलिदान', 'प्रेम प्रपंच', 'केसरिया' और 'महोरां नी आरपार जिंदगी' (मुखौटों के आर-पार ज़िंदगी) जैसी कृतियाँ पाठकों को रोमांच और रहस्य के एक अलग ही सिनेमैटिक संसार में खींच ले जाती ह