Skip to content
Scan a barcode
Scan
Paperback काहे मन अनुरागी [Hindi] Book

ISBN: 9354581277

ISBN13: 9789354581274

काहे मन अनुरागी [Hindi]

निःसंदेह कविता ही वह सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा बेज़ुबान भावों की पूर्ण अभिव्यक्ति सम्भव है । इसीलिए जब अपने मन के अव्यक्त भावों की अभिव्यक्ति की कश्मकश में कुछ लिखना आरंभ किया तो कलम ने भी अपनी गति और दिशा पकड़ ली । काव्य लेखन की तमाम मान्यताओं, नियमों, छंदों, मानदंडों, कसौटी आदि की बंदिशों - दायरों से परे मात्र अभिव्यक्ति के संतोष भाव की पूर्णता ने हृदय को सभी चिंताओं से मुक्त कर दिया । त्रुटियाँ करना इंसान होने की अनिवार्य योग्यता है तो इससे दूर कैसे रहा जा सकता है । परंतु यह भी सच है कि हमारी यही कमियाँ हमें भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं । इस पुस्तक के माध्यम से कुछ ऐसे ही प्रयास का आरंभ तो कर रहा हूँ, अब अन्त ना जाने कहाँ होगा ? परंतु आप सभी के विचार, सुझाव, टिप्पणियों, सद्भावनाओं और आशीर्वाद की चाहत सदैव बनी रहेगी । rajesh.bwn@gmail.com

Recommended

Format: Paperback

Condition: New

$17.37
Ships within 2-3 days
Save to List

Related Subjects

Poetry

Customer Reviews

0 rating
Copyright © 2026 Thriftbooks.com Terms of Use | Privacy Policy | Do Not Sell/Share My Personal Information | Cookie Policy | Cookie Preferences | Accessibility Statement
ThriftBooks ® and the ThriftBooks ® logo are registered trademarks of Thrift Books Global, LLC
GoDaddy Verified and Secured