संख्याओं के इतिहास की शुरुआत मानव सभ्यता के उषाकाल से ही जुड़ी हुई है। हमारे पूर्वजों ने, भले ही उनके पास औपचारिक गणितीय प्रणालियाँ नहीं थीं, फिर भी वस्तुओं की गिनती करने और तुलना करने के तरीके विकसित किए। वे उंगलियों, पत्थरों, या लाठी जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करके संख्याओं का प्रतिनिधित्व करते थे। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी लोग शरीर के विभिन्न अंगों को एक से दस तक की संख्याओं के लिए निर्दिष्ट करते थे। इस प्रकार की प्रारंभिक गणना प्रणालियाँ सरल थीं, लेकिन वे दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थीं।
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