यह पुस्तक "विकसित भारत 2047 और भारतीय ज्ञान परंपरा का अंतरसंबंध" भारत के भविष्य निर्माण की अवधारणा को भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, गीता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के आलोक में प्रस्तुत करती है। इसमें आत्मनिर्भरता, नैतिकता, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों का समकालीन संदर्भ में गंभीर विश्लेषण किया गया है। यह कृति विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं नीति-निर्माताओं के लिए चिंतन और मार्गदर्शन का प्रेरक स्रोत सिद्ध होती है।