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Paperback अहं: एक पवित्र साधन एक पवि&#23 [Hindi] Book

ISBN: 1923861069

ISBN13: 9781923861060

अहं: एक पवित्र साधन एक पवि [Hindi]

अहं एक पवित्र साधन वेदान्त की दृष्टि से अहंकार को समझने की एक सरल, करुणामय और व्यावहारिक यात्रा है। यह पुस्तक अहंकार को नष्ट करने की शिक्षा नहीं देती, बल्कि यह समझाती है कि अस्वस्थ अहंकार को कैसे पहचाना, शुद्ध किया और रूपांतरित किया जा सकता है, ताकि वह सत्य, जिम्मेदारी, विवेक, समर्पण और आत्म-पहचान की सेवा करने वाला स्वस्थ अहं बन सके।

विमला राव इस पुस्तक में व्यक्तिगत पहचान के निर्माण, अस्वस्थ अहं के अनेक रूपों, मन, बुद्धि, चित्त, अवचेतन, अहंकार, पंचकोश, प्रकृति के तीन गुणों और साक्षी आत्मा जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाती हैं। चिंतन, दैनिक जीवन के उदाहरणों और आध्यात्मिक दृष्टि के माध्यम से पाठक को भय, तुलना, आहत भाव, नियंत्रण, गर्व और असुरक्षा से आगे बढ़कर विनम्रता, करुणा, आंतरिक स्थिरता और स्वतंत्रता की ओर ले जाया जाता है।

यह पुस्तक साधकों, चिकित्सकों, हीलरों, अध्यात्म में रुचि रखने वालों और उन सभी पाठकों के लिए है जो स्वयं को अधिक गहराई से समझना चाहते हैं। इसका केंद्रीय संदेश स्पष्ट है अहंकार हमारा अंतिम सत्य नहीं है, परंतु सही रूप में समझा जाए तो वह आत्म-विकास, समर्पण और आत्म-पहचान की यात्रा में एक पवित्र साधन बन सकता है।

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